24 जून, 2011

कांग्रेस न भाजपा, चुनाव लडेंग़े हजकां के चिन्ह पर : कुलदीप

ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
हिसार के सेक्टर पंद्रह स्थित आवास पर हरियाणा जनहित कांग्रेस के सुप्रीमो कुलदीप बिश्श्रोई कार्यकत्र्ताओं से मिलते हुये।
हिसार, 23 जून। हरियाणा जनहित कांग्रेस के सप्रीमो व मंडी आदमपुर के विाधायक कुलदीप बिनोई आज सायं हिसार सेक्टर पंद्रह स्थित आवास पर पहुंचे और कार्यकत्र्ताओं से मिले। इस अवसर पर श्री बिश्रोई ने यह बात साफ कर दी कि वे न तो कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं और नही भारतीय जनता पार्टी में। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की अफवाहें उड़ा कर उन्हें कमज़ोर करने का प्रयास सफल नहीं होगा।  हरियाणा जनहित कांग्रेस के चिन्ह पर ही हिसार लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव लड़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि हिसार की जनता भलीभांति जानती है कि चौ. भजनलाल की विरासत किन सुरक्षित हाथों में सौंपनी है।
हिसार लोकसभा क्षेत्र से हजकां प्रत्याशी कौन होगा? इसके जवाब में कुलदीप बिश्रोई ने कहा कि यह फैसला तो पार्टी की हाई पावर कमेटी ही करेगी लेकिन वे इतना कह सकते हैं कि प्रत्याशी हमारे परिवार का ही कोई सदस्य होगा। इस अवसर पर पूर्व सांसद रामजीलाल, रणधीर पनिहार, रामनिवास राड़ा, सूबे सिंह आर्य, गुलज़ार काहलों, सत्यनारायण गुर्जर, कृष्णा यादव, सरोज सिहाग, महावीर गावडिय़ा, सुभाष टाक, बिनोई सभा के सुभाष बिश्रोई, देवीलाल बिनोई आदि मौजूद थे। इससे पहले कुलदीप बिश्रोई ने आज मंडी आदमपुर के डेढ़ दर्जन गांवों का दौरा भी किया। इस तरह कुलदीप बिश्रोई ने उपचुनाव के लिये कार्यकत्र्ताओं को तैयार रहने के संकेत दे दिये।
उल्लेखनीय है कि चौ. भजनलाल के निधन के बाद आज पहली बार कुलदीप बिश्रोई ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब दिये। आज गुडग़ांव के गांव हयातपुर में सरपंच की हत्या की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते श्री बिश्रोई ने कहा कि हरियाणा में जंगलराज है और कानून-व्यवस्था चौपट हो चुकी है। लोगों ने कानून को अपने हाथ में लेने से संकोच नहीं किया और पुलिस मूकदर्शक बन कर देखती रही।

21 जून, 2011

कुलदीप बोले: अब कांग्रेस में क्या खाक जाएंगे

हिसार. हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस में वापसी करने से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि चौधरी भजनलाल के रहते हुए कांग्रेस में वापसी नहीं की। अब तो सवाल ही नहीं उठता। हम हिसार लोकसभा चुनाव क्षेत्र से हर हाल में चुनाव लड़ेंगे और अपने ‘घर’ को पहले की तरह मजबूत रखेंगे।

कुलदीप आदमपुर में अपने पिता की याद में जागरण और भंडारा करने के बाद शाम को दिल्ली स्थित आवास पर चले गए थे। वहां से दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा—हजकां का किसी भी पार्टी में विलय नहीं होगा। चाहे वह कांग्रेस हो, बीजेपी हो या फिर कोई और। जहां तक उपचुनाव में समझौते की बात है तो इस बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी।

उन्होंने कहा कि उपचुनाव में कौन प्रत्याशी होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। अभी तो चुनाव ही घोषित नहीं हुए हैं। प्रत्याशी का फैसला पार्टी की हाई पावर कमेटी करेगी। मगर इतना बता सकता हूं कि परिवार का ही कोई सदस्य चुनाव लड़ेगा। एक तरफा चुनाव रहेगा, क्योंकि लोगों की भावनाएं हमारे परिवार के साथ हैं। कुलदीप ने कहा, हिसार से हमारी पहचान है और हमसे हिसार की। यह हमारा गढ़ है और हमेशा रहेगा। यहां के लोगों का हमारे परिवार पर गहरा विश्वास है। चौधरी भजनलाल के जाने के बाद अब मुझ पर उस विश्वास को कायम रखने की जिम्मेदारी है।

इसे बरकरार रखने के लिए तय किया है कि सप्ताह में तीन दिन हिसार लोकसभा क्षेत्र में रहूंगा और बाकी चार दिन हरियाणा में। पहले पिताजी यहां अपना पूरा समय देते थे और बाकी प्रदेश को। मैंने हिसार में 2 जून से पहले छह हलकों का दौरा किया था। अब फिर से दौरे शुरू किए जाएंगे।

भाजपा के साथ नजदीकियों को लेकर चर्चाओं पर कुलदीप ने कहा कि चौधरी भजनलाल बड़े आदमी थे। उनके कई नेताओं के साथ पारिवारिक रिश्ते थे। अब किसी बात का कोई क्या मतलब निकाले, कुछ नहीं कह सकता। बीजेपी के साथ समझौते पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस में वापसी को लेकर अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष शमशेर सुरजेवाला के निमंत्रण को लेकर हजकां सुप्रीमो ने कहा कि यह उनका प्यार है। इतना सीनियर व्यक्ति मेरे लिए कुछ कहे, यह मेरे लिए गर्व की बात है। हालांकि वहां और भी कई नेता बैठे थे।

कांग्रेस में वापसी एक चुटकला

कांग्रेस में वापसी की बात सुनता हूं तो मुझे यह एक चुटकला लगता है। वापसी तो दूर की बात है, इस बारे में सोचता भी नहीं हूं। विपक्ष अफवाहें उड़ाता रहता है। कौन फैला रहा है, यह पता नहीं। इसके पीछे कांग्रेस भी हो सकती है और इनेलो भी।

हिसार में भजन का 16वां होते ही बिछी उपचुनाव की बिसात

चंडीगढ़. 18 जून को चौ. भजनलाल का 16वां होते ही हिसार में लोकसभा उपचुनाव का बिगुल बज गया है। अब यहां के नेता व जनता लोकसभा में नया प्रतिनिधि भेजने पर मंथन करने लगे हैं। अब तक के हालात देखे जाएं तो मामला रोचक बना हुआ है।

सबसे पहले कुलदीप बिश्नोई की हजकां के कांग्रेस में विलय होने या न होने पर बड़ा सवाल है? उनको शोकसभा के दौरान न्यौता मिल चुका है। वे कांग्रेस में आते हैं तो स्थिति विपरीत होगी। वे पुरानी बात पर अड़िग रहे तो यहां कांग्रेस प्रत्याशी बनने की लंबी कतार है। इनमें चौधरी रणजीत सिंह, जयप्रकाश जेपी, प्रेमलता व जयसिंह बिश्नोई का नाम मुख्य रूप से चर्चा में है।

यहां मंत्री नहीं बनाने के कारण सावित्री जिंदल खेमे की अलग चर्चाएं हैं। वरिष्ठ नेता संपत सिंह के मन में भी कहीं न कहीं यह दर्द जरूर होगा? वहीं वे कांग्रेसी अभी से चिंतित हैं जो भजनलाल परिवार से उनके गढ़ में जूझते रहे हैं। इन हालातों पर मुख्यमंत्री हुड्डा को बड़ा मंथन करना होगा।

हालांकि हिसार, सिरसा, फतेहाबाद,भिवानी की बागड़ व कुछ हिस्सा बांगर कही जाने वाले बैल्ट में हुड्डा ने कड़ी मेहतन की है। कई रैलियों में विकास के लिए अरबों खर्च दिए। जनता इसका कितना कर्ज उतारती है,यह अलग बात है। फिलहाल विपक्ष भी हजकां के उलटफेर पर नजर टिकाए हुए है। भाजपा के राष्ट्रीय नेता कैप्टन अभिमन्यु स्वयं यहां से चुनाव लड़ सकते हैं।

इधर, प्रमुख विपक्षी दल इनेलो पूरी कूटनीति से चुनाव की तैयारी में है। इसी लोकसभा में आने वाले उचाना विधानसभा क्षेत्र से इनेलो सुप्रीमो एवं विपक्ष के नेता ओमप्रकाश चौटाला विधायक हैं। दल के प्रधान महासचिव अजय चौटाला यह दावा कर चुके हैं कि सबसे पहले प्रत्याशी घोषित करेंगे। वैसे यहां से सुरेन्द्र बरवाला, उमेद लोहान का नाम जनता ले रही है। वैसे इस उपचुनाव में मुद्दा भजनलाल परिवार के प्रति सहानुभूति व हुडडा का विकास रहेगा जबकि इनेलो भ्रष्टाचार व कानून व्यवस्था को आगे लाएगा।

06 जून, 2011

25 साल कांग्रेस में रहे

25 साल कांग्रेस में रहे




भजन लाल ने 25 साल से ज्यादा कांग्रेस में बिताए। 2005 के चुनाव के बाद जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया गया तो वे पार्टी से खफा हो गए। हालांकि उनके बड़े बेटे चंद्रमोहन को उप मुख्यमंत्री बनाया गया मगर छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस की खुले तौर पर मुखालफत शुरू कर दी। 2007 में पिता-पुत्र ने कांग्रेस छोड़कर हजकां पार्टी बना ली।



भजनलाल एक योग्य सांसद और लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने कुशल प्रशासक के रूप में अपनी छाप छोड़ी। ""



जगन्नाथ पहाड़िया, राज्यपाल



भजनलाल ने सारा जीवन समाज सेवा में गुजारा। उनके निधन से हुई क्षति को भरना नामुमकिन है।""



भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री



प्रदेश ने एक मृदुभाषी व सक्रिय राजनेता खो दिया है। भजनलाल हंसमुख स्वभाव के नेता थे।""



ओमप्रकाश चौटाला, अध्यक्ष, इनेलो



भजन के निधन से राजनीति में खालीपन आ गया। वे सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता थे।""



कृष्णपाल गुर्जर, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

हरियाणा में ‘लाल युग’ का अंत

चंडीगढ़. ..बड़े गौर से सुन रहा था जमाना, तुम्हीं सो गए दास्तां कहते-कहते..




कहावत है कि ‘हरियाणा में सिर्फ तीन लाल। देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल।’ राजनीतिक धुरंधर भजनलाल के निधन के साथ ही हरियाणवी सियासत का लाल युग भी समाप्त हो गया। राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक चर्चित लालों की राजनीति की अंतिम धुरी 81 वर्षीय भजनलाल शुक्रवार को आखिरी बार लोगों के बीच सशरीर मौजूद थे।



सियासी विरोधी भी थे मृदुभाषा के कायल



नई दिल्ली. पाकिस्तान के बहावलपुर में पैदा होने के बावजूद आदमपुर पंचायत में पंच से सियासी सफर की शरुआत करने वाले इस कुशल राजनेता ने सियासत की तमाम बुलंदियां हासिल कीं, लेकिन पद का दंभ उन्हें कभी छू तक नहीं पाया। एक कुशल राजनेता, अनुभवी प्रशासक के साथ-साथ उनकी मृदुभाषा के कायल उनके समर्थक ही नहीं, बल्कि सियासी विरोधी भी थे।



अपने रणनीतिक कौशल के बूते कठिन से कठिन हालात से साफ बच निकलने के फन में माहिर भजनलाल ने ‘नेवर से डाई’ की अवधारणा पर काम करते हुए जीवन के अंतिम पल तक हार नहीं मानीं। खराब सेहत के बावजूद 2009 के चुनाव में संपत सिंह व जयप्रकाश जैसे दिग्गजों को एक साथ पटखनी देकर उन्होंने अपने कौशल का प्रमाण दिया।



कई फैसले ऐसे, जो आज भी जुबान पर



चंडीगढ़. भजनलाल जैसे धुरंधर नेताओं की राजनीतिक कहानी कभी खत्म नहीं होती, बल्कि इतिहास बन जाती है। इस नेता के फैसले आज भी जन-जन, अफसरशाही और राजनेताओं की जुबान पर हैं। राजीव गांधी सरकार में पर्यावरण मंत्री रहते उन्होंने यमुना-गंगा जल शुद्धिकरण की योजना शुरू की। भजनलाल के मुख्यमंत्री काल के बारे में एक वरिष्ठ अफसर बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहला फैसला सफाई कर्मियों के वेतन में सौ रुपए का इजाफा करने का लिया। इससे श्रमिक वर्ग में उनकी अच्छी-खासी पैठ बन गई। पेयजल योजना और तीन किलोमीटर के दायरे में स्कूल जैसे निर्णय भजनलाल ने ही लिए थे।



केंद्र सरकार में थी अच्छी-खासी पैठ



चंडीगढ़. साधारण पंच के रूप में राजनीतिक मैदान में उतरे भजनलाल एक दिन केंद्र सरकार में जबरदस्त पैठ बना लेंगे, यह शायद उनके अलावा किसी ने नहीं सोचा होगा। उन पर राजीव गांधी को इतना भरोसा था कि उन्हें अपने प्रदेश के अलावा राजस्थान की भी कमान दी गई थी। यह अलग बात है कि वहां भैरो सिंह शेखावत बाजी मार ले गए।



भजनलाल 1 जनवरी 1968 को विधानसभा के सदस्य चुने गए। यह कारनामा उन्होंने 5 बार किया। 1 जनवरी 70 को वे प्रदेश के कृषि, सहकारिता व पशुपालन मंत्री बने। लोकसभा से मंत्री बनने के बाद वे राज्यसभा से भी एक बार मंत्री बने। 2007 में उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया।



परिचय



जन्म : 6 अक्टूबर 1930

स्थान: बहावलपूर (पाक पंजाब)

सियासी शुरुआत: आदमपुर पंचायत में पंच के रूप में

मुख्यमंत्री पद: दो बार संभाली कमान (1979-85), (1991-96)।



केंद्रीय राजनीति



राजीव गांधी के नेतृत्व वाली भारत सरकार में मंत्री रहे

एक बार राज्यसभा सदस्य भी रहे

आखिरी बार 2009 में हिसार से हजकां के चुनाव चिह्न् पर लोकसभा का चुनाव जीता



आतंकी निशाने पर भी थे



पंजाबी बोली के क्षेत्र और पानी के मुद्दे पर भजनलाल पंजाब के आतंकवादियों के निशाने पर भी रहे। वे 77 में देवीलाल की बहुमत वाली सरकार गिराने के बाद चर्चा में आए। 2005 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाने से खफा होकर भजनलाल ने कांग्रेस ने नाता तोड़ दिया। 2004 में भिवानी लोकसभा सीट से बेटे कुलदीप बिश्नोई को चुनाव लड़ाया। सामने देवीलाल के पोते अजय चौटाला और बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह थे। इस चुनाव में जीत से भजनलाल का नाम और चमक गया।



अधिकारी वर्ग पर पूरी पकड़



भजनलाल के करीबी रहे आईएएस सेवानिवृत्त एलएन मेहता बताते हैं कि उनकी अधिकारी वर्ग पर पूरी पकड़ थी। इंसानियत इतनी कि उनके घर में विशेष आदेश थे कि कोई बिना चाय-पानी न जाए।



लालों पर फिल्म भी बनी



हरियाणा के तीन लालों पर आधारित अनिल कपूर पर फिल्माई गई एक फिल्म भी आई, जो हरियाणा में खूब लोकप्रिय हुई। इस फिल्म में पूरे हरियाणा की सियासत तीनों लालों के इर्द-गिर्द दिखाई गई है।



अनुभवी नेता थे भजन: हुड्डा



सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भजनलाल एक अनुभवी नेता थे। उनका लंबे समय तक कांग्रेस से संबंध रहा। वे लंबे समय तक हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने पूरा जीवन समाजसेवा में गुजारा, जिनके निधन से हुई क्षति को भरना नामुमकिन है।



दूरदर्शी राजनीतिज्ञ: पहाड़िया



राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने भजनलाल के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भजनलाल एक योग्य सांसद, दूरदर्शी राजनीतिज्ञ और लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और अन्य पदों पर रहते हुए कुशल प्रशासक के रूप में छाप छोड़ी है।



हंसमुख स्वभाव था: चौटाला



इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने कहा कि हरियाणा ने भजनलाल के रूप में एक मृदुभाषी नेता खो दिया है। चौटाला ने भजनलाल को हंसमुख स्वभाव के राजनेता बताते हुए कहा कि उनके निधन से प्रदेश को गहरा झटका लगा है।



अच्छे राजनेता थे: फिजा



भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन की पूर्व पत्नी अनुराधा बाली उर्फ फिजा ने कहा कि भजनलाल अच्छे राजनेता थे। उनकी भजनलाल से कई बार बात हुई है। हालांकि फिजा ने भजनलाल के निजी जीवन पर सीधे तौर पर टिप्पणी नहीं की।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल का निधन

चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल को दिल का दौरा पड़ जाने से निधन हो गया है। दिल का दौरा पडऩे के बाद उन्हें आज दोपहर को हिसार के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया हैं। 12 साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भजन लाल हिसार के रविंद्रा अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था जहां उनकी हालत नाजुक थीं। । डॉक्टरों की ओर से प्रयास किए जाने के बावजूद भी उनकी जान को नहीं बचाया जा सका और अस्पताल के आईसीयू में उनका निधन हो गया। वह हरियाणा के मुख्यमंत्री रहने के अलावा दो केंद्र में भी मंत्री रह चुके थे।


देश की राजनीति में 60 के दशक के लगातार अहम योगदान देने के बाद चौधरी भजनलाल बिश्नोई शुक्रवार को अलविदा कह गए। इसी के साथ राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक चर्चित लालो की राजनीति का अंत हो गया। देवीलाल,बंसी लाल के बाद करीब 82 वर्षीय भजनलाल के निधन से हरियाणा शोक में डूब गया। वर्तमान में उन्होंने क्षेत्रीय दल हरियाणा जनहित कांग्रेस के संरक्षक एवं हिसार लोकसभा सीट से सांसद भी थे।

11 वर्ष 9 माह 27 दिन मुख्यमंत्री, राजीव गांधी की केंद्र सरकार में कृषि मंत्री के रूप में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अब तक का सर्वाधिक कार्यकाल बिताया। वे हरियाणा में जून 1979 में देवीलाल की जनता पार्टी सरकार में कृषि मंत्री रहते पहली बार मुख्यमंत्री बनें। बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। 1989 में केन्द्रीय कृषि एवं पर्यावरण मंत्री रहे। विशेष बात यह भी रही भजनलाल ने करनाल,फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र से भी संसद का रास्ता तय किया। फिलहाल वे हिसार से सांसद थे। अपने जीवन में वे केवल करनाल से लोकसभा का एक चुनाव हारे। हिसार जिले का आदमपुर उनका अभेद दुर्ग रहा। यहां से वे उनका परिवार का सदस्य 68 से आजतक कोई चुनाव नहीं हारे।

गांधी परिवार से भजनलाल के प्रगाढ़ रिश्ते रहे। उनको इंदिरा गांधी ने ही मुख्यमंत्री बनाया,बाद में राजीव गांधी ने अपने केन्द्रीय मंत्री मंडल में सहयोग लिया। गांधी परिवार ने भजनलाल का प्रयोग अन्य राज्यों के लिए भी किया। 91 में राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए भजनलाल को भेजा गया। यह बात अलग है कि भैरोंसिंह शेखावत बाजी मार गए। हरियाणा के तीन लालों के किस्से देश के कौनसे-कोने में मशहूर हैं। तीनों ही लालों ने देश की राजनीति में अपना पूरा योगदान दिया। केन्द्रीय मंत्री मंडल में तीनों से अपना वर्चस्व अलग ही रखा। यहां तक कि अनिल कपूर की एक फिल्म में तीनों लालों के नाम पर कलाकारों के नाम रखे गए।

भजनलाल को हरियाणा की राजनीति का पीएचडी भी कहा जाता रहा है। इस हरफनमौला खिलाड़ी के सामने अच्छों अच्छों के कदम डगमगा जाते थे। ये 77 में देवीलाल के अति बहुमत वाली सरकार गिराने के बाद चर्चा में आए। 2005 में सोनिया गांधी ने भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया। इससे खफा होकर भजनलाल ने कांग्रेस ने नाता तोड़ दिया। इससे पूर्व 2004 में भजनलाल ने एक चैलेंज को स्वीकार करते हुए भिवानी लोकसभा सीट से बेटे कुलदीप बिश्नोई को चुनाव लड़ाया। सामने देवीलाल के पोते अजय चौटाला व बंसी लाल के बेटे सुरेंद्र सिंह थे। इस चुनाव में जीत से भजनलाल की पीएचडी की तारीफ हुई। पंजाबी बोली के क्षेत्र व पानी के मुद्दे पर वे पंजाब के आतंकवादियों के निशाने पर भी थे। उनको सरकार ने विशेष सुरक्षा दे रखी थी। जीवन के 81 बसंत देखने के बाद भी वे राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय थे।

प्रदेश की राजनीति हुई ‘लाल’ विहीन

चंडीगढ़. 5 दशकों तक प्रदेश की राजनीति देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के आसपास ही घूमती रही। पहले देवीलाल 2001 में और चौधरी बंसीलाल 28 मार्च 2006 को प्रदेश की जनता का साथ छोड़ गए थे। दोनों की मौत के बाद प्रदेश की जनता के पास भजनलाल ही एक ‘लाल’ बचे थे, जिनके निधन से प्रदेश की राजनीति को बहुत बड़ा झटका लगा है।




केंद्र से राज्य तक कई निर्णय



भजनलाल जैसे धुरंधर नेताओं की राजनीतिक कहानी कभी खत्म नहीं होती बल्कि एक इतिहास बन जाती है। इस हरफनमौला के फैसले आज भी जन-जन, अफसरशाही व राजनेताओं की जुबान पर है। राजीव गांधी सरकार में केंद्र में वन व पर्यावरण मंत्री रहते उन्होंने राजीव गांधी के प्रेरणा से यमुना-गंगा जल शुद्धिकरण का प्लान शुरू किया। यह पर्यावरण की दिशा में उठाया गया उनका बड़ा कदम रहा। उन्हें पर्यावरण प्रेमी कहा जाने लगा।



हिसार में भजनलाल के मुख्यमंत्री रहते अधिकारी रहे एक वरिष्ठ अफसर बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहला फैसला सफाई कर्मियों के वेतन में सौ रुपए का इजाफा करने का किया। इससे उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया वे गरीब हितैषी हैं।



अपना धन अपनी बेटी योजना, एससी वर्ग के ए व बी का बंटवारा। हरियाणा के लिए पेयजल योजना,तीन किलोमीटर के दायरे में स्कूल जैसे निर्णय भजनलाल ने लिए। भजनलाल के करीब आईएएस से सेवानिवृत्त एलएन मेहता बताते हैं कि वे एक खूबी वाले इंसान थे। अधिकारी वर्ग पर खासी पकड़, गरीब हितैषी, संवेदनशीलता उनके मन कूट-कूट कर भरी थी। अधिकारियों के प्रति कभी द्वेष की गांठ नहीं बांधी। इंसानियत इतनी कि उनके घर में विशेष आदेश थे कि कोई बिना चाय-पानी ना जाए।



खासतौर से जब वे घर नहीं रहते थे तो आदेश देकर जाते थे। मुख्यमंत्री रहते सवा पांच बजे उनके घर का दरवाजा खुल जाता था। वे दरवाजा खोलने खुद आते थे। लोगों से मुलाकात का दौर शुरू हो जाता। राजनीति का माहिर यह खिलाड़ी जनता के काम के जरिए दिलों में बस गया। उम्र के तकाजे के कारण बाद में उन्हें दिक्कत आने लगी, हालांकि अंतिम पड़ाव तक उन्होंने अपनी उम्र को राजनीति के निर्णयों मंे आड़े नहीं आने दिया।



गांधी परिवार से थे प्रगाढ़ रिश्ते



गांधी परिवार से भजनलाल के प्रगाढ़ रिश्ते रहे। उनको इंदिरा गांधी ने ही मुख्यमंत्री बनाया,बाद में राजीव गांधी ने अपने केन्द्रीय मंत्री मंडल में सहयोग लिया। गांधी परिवार ने भजनलाल का प्रयोग अन्य राज्यों के लिए भी किया। 91 में राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए भजनलाल को भेजा गया। यह बात अलग है कि भैंरोसिंह शेखावत बाजी मार गए।



हरियाणा के तीन लालों के किस्से देश के कौने-कौने में मशहूर हैं। तीनों ही लालों ने देश की राजनीति में अपना पूरा योगदान दिया। केन्द्रीय मंत्रीमंडल में तीनों से अपना वर्चस्व अलग ही रखा। यहां तक कि अनिल कपूर की एक फिल्म में तीनों लालों के नाम पर कलाकारों के नाम रखे गए। भजनलाल को हरियाणा की राजनीति का पीएचडी भी कहा जाता रहा है। इस हरफनमौला खिलाड़ी के सामने अच्छे-अच्छों के कदम डगमगा जाते हैं। ये 77 में देवीलाल के अति बहुमत वाली सरकार गिराने के बाद चर्चा में आए।



गैर जाट सियासत के झंडाबरदार



एक अल्पसंख्य बिश्नोई संप्रदायक से संबद्ध होने के बावजूद हरियाणा जैसे जातिगत समीकरणों वाले प्रदेश में भजनलाल की गिनती पूरे दो दशकों तक गैर जाट समुदाय की सियासत के निर्विरोध चैंपियन के रूप में होती रही। 2004 में बेटे कुलदीप बिश्नोई का भिवानी लोकसभा चुनाव हो या फिर 2009 में खुद का हिसार लोकसभा चुनाव, दोनों ही बार विपरीत हालात व खराब सेहत के बावजूद उन्होंने जिस रणनीति के जरिए जीत हासिल करके विरोधियों को पटखनी दी, वह उनके कौशल की कहानी खुद बयां करती है।



भजन ने पूरे जीवन में न तो कभी हार मानी और न ही आम जनों से दूरी बनने दी। यही कारण है कि 80 साल की उम्र में भी वे लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी नई पार्टी की साख बचाने में कामयाब रहे और अंतिम सांस तक सियासत से सन्यास पर विचार तक नहीं किया।



दक्षिण हरियाणा से मिलता रहा सहयोग



रेवाड़ी . हरियाणा प्रदेश में 13 साल तक मुख्यमंत्री बने रहने का पॉलीटिक्ल रिकॉर्ड बरकरार रखने वाले दिग्गज नेता भजनलाल को दक्षिण हरियाणा ने हमेशा सम्मान दिया। सत्ता में इतनी लंबी पारी खेलने की ताकत अगर कहीं से मिली तो यहां से मिली। वजह भजनलाल नॉन जाट नेता के तौर पर जब उभरे तो यहां की जनता ने उन्हें निराश नहीं किया।



यहीं वजह है कि यहां के नेताओं से आज भी भजनलाल से अच्छे संबंध रहे हैं। भजनलाल को दक्षिण हरियाणा में विकास और राजनीति की नजर से देखे तो दोनों आपस में दूरियां बनाती रही हैं। जो विकास भजनलाल करवाना चाहते थे, कोशिश की थी या किसी कारणवश नहीं करवाया पाए उसका मलाल आज भी यहां की जनता को है। सन् 1979 में पहली बार मुख्यमंत्री बने तो यहां की जनता का वोटबैंक सबसे ज्यादा रहा। 1982 से 86 तक सीएम रहे तो दक्षिण हरियाणा के मतदाताओं ने अपने समर्थन का ग्राफ कम नहीं होने दिया। विकास कार्य नहीं हुआ तो नाराजगी भी खुलकर सामने रखी।



भजनलाल ने वायदा किया कि पुरानी गलतियां नहीं दोहराएंगे, जो वायदे किए हैं वह सीएम बनने पर पूरा करेंगे। यहां के मतदाताओं ने फिर विश्वास जताया और राजनीति के गुणा भाग में सबसे ज्यादा अंक देकर सन् 1991 में सीएम बनाने की अपनी अह्म भूमिका को फिर दोहरा दिया। भजनलाल इस बार पुरानी गलती नहीं करना चाहते थे लिहाजा मई 1995 में उन्होंने रेवाड़ी जिले में विकास कार्यो की पांच आधारशिलाएं रखी। मीरपुर में रीजनल सेंट, जिला सचिवालय, कालाका वाटर सप्लाई, धामलावास में पॉलीटैकAीकल कॉलेज और बलियर खुर्द में प्रिटिंग प्रेस की नींव रखी। सरकार बदलते ही विकास कार्यो ने भी अपने चेहरे बदल लिए।



वर्तमान में रीजनल सेंटर, कालाका वाटर सप्लाई और जिला सचिवालय जैसे तैसे बन गए लेकिन धामलावास की 22 एकड़ जमीन आज भी कॉलेज के आने का इंतजार कर रही है। बलियर खुर्द में प्रिटिंग प्रेस की जगह 66 केवी पॉवर हाऊस ने ले ली। इसके अलावा यहां की जनता को भजनलाल के शासनकाल का कोई बड़ा विकास कार्य याद नहीं है।



कांग्रेस छोड़ने के बाद और लगातार गिरते स्वास्थ्य की वजह से यहां के क्षेत्रीय नेताओं ने भी इस नेता से दूरियां बनानी शुरू कर दी। नतीजा हजकां को आज भी अपनी राजनीति जमीन तैयार करने में अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद दक्षिण हरियाणा का एक तबका आज भी इस नेता की वर्क स्टाइल और मिलनसार स्वभाव को सलाम करता है। कुल मिलाकर भजनलाल की राजनीति पर जब भी चर्चा होगी उसमें अहीरवाल की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण माना जाएगा।



दुश्मन-दोस्त में नहीं था फर्क



नारनौल. चौधरी भजनलाल के साथ उनके मुख्यमंत्री रहते 5 वर्षो तक मैंने बतौर ड्राइवर काम किया। हालांकि चौधरी देवीलाल, बनारसीलाल गुप्ता, ओमप्रकाश चौटाला, मा. हुकमसिंह, चौधरी बंसीलाल की भी मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा करने और गाड़ी चलाने का मुझे मौका मिला। भजनलाल जी की विशेषता यह थी कि उनके पास जब भी कोई आदमी अपनी समस्या लेकर पहुंचता था तो वे उसका समाधान जरूर करवाते थे। काम करवाने में अपने और पराये का भेद उन्होंने कभी नहीं रखा।



कई बार चापलूस किस्म के लोग चौधरी भजनलाल को बताते भी थे कि फलां व्यक्ति ने हमें कभी वोट नहीं दिया या उसने हमारी खिलाफत भी है तो भी चौधरी भजन लाल ने किसी का काम नहीं रोका। उनका कहना था कि अगर किसी पिता ने हमारा साथ नहीं दिया तो उसके पुत्रों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वे अक्सर कहां करते थे जो आज हमारा नहीं है, कल जरूर हमारा हो जाएगा। इसलिए दुश्मन को भी दोस्त बनाना चाहिए। भजन लाल जी की एक विशेषता यह भी थी कि वे पूजा पाठ रोजाना करते थे। सुबह पांच बजे से आठ-नौ बजे तक लोगों से मिलना और उसके बाद कम से कम एक घंटा पूजा करने में लगाना, उनकी दिनचर्या में शामिल था। जसमा देवी का भी धार्मिक कामों में पूरा सहयोग भजन लाल देते थे। उनके घर में एक ऐसा दीपक भी था जो दिनरात जलता रहता था।



भजनलाल के पूर्व ड्राइवर, शिवनारायण मोरवाल, गांव सुराना, नारनौल।

जहां से चाहा वहीं से जीते,

सोनीपत. राजनीति में पीएचडी कहे जाने वाले भजनलाल ने जहां से चाहा वहीं से चुनाव जीता। बस करनाल के लोगों ने उनका यह रिकार्ड तोड़ दिया था। वे करनाल, हिसार और फरीदाबाद से सांसद बने थे। जबकि आदमपुर से हमेशा विस का चुनाव जीतते रहे। राजनीति के तगड़े हरफनमौला खिलाड़ी भजनलाल ने प्रदेश की राजनीति में जो चाहा वही किया। वे प्रदेश के हर कोने से चुनाव जीतने में समक्ष थे।




यह कारनामा उन्हें करके भी दिखाया। वे करनाल और फरीदाबाद से भी लोकसभा का चुनाव जीते। जीवन में सिर्फ एक चुनाव करनाल से हार गए थे। जिसका मलाल उन्हें हमेशा रहा। पंचायत समिति हिसार से सदस्य के रूप में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले भजनलाल 1962 में ब्लाक समिति के सदस्य चुने गए थे। इसी प्लान में चेयरमैन बने। उन्होंने आदमपुर से 1968 मे पहला विधानसभा चुनाव जीता और उसके बाद वे जीतते ही चले गए।



यह उनका रुतबा ही था कि उन्होंने जिसे चाहा उसे ही आदमपुर से चुनाव जिताया। उन्होंने 1987 में अपनी पत्नी जस्मा देवी को विधायक बनाया। उसके बाद 1988 में उन्होंने अपने छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई को विधानसभा में भेजा। उन्होंने फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से 1989 में सांसद का चुनाव लड़ा और जीत गए। उसके बाद उन्होंने 1998 में करनाल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, उन्हें भारी जीत मिली, लेकिन वे 1999 में करनाल से हार गए। उनके करियर में यह पहली और आखिरी हार थी।



चंद्रमोहन को भी बना दिया विधायक



भले ही चंद्रमोहन राजनीति में कामयाब साबित नहीं हुए हो, लेकिन उन्होंने उन्हें छोटी उम्र में ही विधायक बनाया। कालका विस क्षेत्र से चंद्रमोहन ने 1993 में उपचुनाव जीता था। उसके बाद वे 1996, 2000, 2005 में कालका सीट से ही विधायक बने। फिजा प्रकरण के बाद चंद्रमोहन को कांग्रेस ने 2009 के आम चुनावों में टिकट नहीं दिया था।



मारवाड़ से था गहरा लगाव



जोधपुर. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के संरक्षक भजनलाल बिश्नोई का मारवाड़ से गहरा लगाव था। 1860 में उनके पूर्वज फलौदी तहसील के मोरिया मूंजासर गांव से पंजाब प्रांत के बहावलपुर (अब पाकिस्तान में) पलायन कर गए थे, लेकिन वे अपने पुरखों की धरा को कभी नहीं भूले। वे जब भी राजस्थान के दौरे पर आए तो पूर्वजों के गांव जाना नहीं भूलते थे। पहले वे कपड़े का व्यापार करते थे। उनका मारवाड़ में आना-जाना लगा रहता था।



मारवाड़ से उनके लगाव का इससे भी पता चलता है कि वे परिचितों से कई बार पूछते रहते थे कि यहां इस बार बारिश और फसलों की क्या स्थिति है। बीकानेर मुकाम में ही उन्हें बिश्नोई रत्न की उपाधि से नवाजा गया था। गत वर्ष 2 मई को मूंजासर गांव में जंभेश्वर मंदिर के लोकार्पण समारोह में उनका आने का कार्यक्रम बना था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वे नहीं आ सके।



यहां वे आखिरी बार वर्ष 1995 में आए थे। लोगों के बार-बार आग्रह पर 28 से 30 अक्टूबर तक मुकाम (बीकानेर) में बिश्नोई समाज की स्थापना के 525 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित रजत जयंती समारोह में उन्होंने शिरकत की थी। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष रहे स्व. पूनमचंद विश्नोई, पूर्व मंत्री स्व. रामसिंह विश्नोई व सांचौर के पूर्व विधायक हीरालाल विश्नोई से उनके घनिष्ठ संबंध थे।



आखिरी बार जोधपुर वे रामसिंह विश्नोई के निधन पर आए थे। इससे पहले उन्होंने 15 से 17 जनवरी 1981 को जोधपुर के टाउन हॉल में अखिल भारतीय बिश्नोई जीव रक्षा सभा की ओर से आयोजित पर्यावरण में जन भागीदारी विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की थी। उस समय वे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। मारवाड़ में विश्नोई समाज के विकास में उनकी अहम भूमिका रही है। उनके कार्यकाल में ही खेजड़ली गांव में शहीद स्मारक बनाया जा सका। इसके अलावा बीकानेर के मुकाम में मुक्तिधाम व दिल्ली में दस करोड़ की लागत से छात्रावास भी बनाया।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का निधन

हिसार। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का निधन हो गया है। वे 77 वर्ष के थे। गुरुवार की दोपहर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। भजनलाल कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में से एक रहे हैं। पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री न बनाए जाने से नाराज होकर उन्होंने अपने पुत्र कुलदीप बिश्नोई के साथ मिलकर अलग पार्टी (हरियाणा जनहित कांग्रेस) बना ली थी।
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक आज अचानक भजनलाल को दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें स्थानीय रविंद्र गुप्ता अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक ने भजनलाल को दिल के दौरे के अतिरिक्त ब्रेन हैमरेज की भी आशंका व्यक्त की थी। उन्होंने बेहतर इलाज के लिए भजनलाल को दिल्ली ले जाने की सलाह दी थी लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

भजनलाल दो बार हरियाणा के सीएम रहे हैं। पहली बार 1979 से 1985 तक तो दूसरी बार 1991 से 1996 तक। राजीव गांधी सरकार में वे केंद्रीय कैबिनेट के सदस्य भी रहे। भजनलाल के दो पुत्र हैं। एक कुलदीप बिश्नोई और दूसरे चंद्रमोहन !

03 जून, 2011

जनता के विश्वास की बोली लगाने वाले विधायकों को लाया जाएगा

हांसी, संवाद सहयोगी : हरियाणा जनहित काग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि लोगों के विश्वास की बोली लगाने वाले पाचों विधायकों को हर हाल में जनता के दरबार में लाया जाएगा। इसके बाद जनता ही सही और गलत का फैसला करेगी। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि मैंने न कभी जनता के विश्वास की बोली लगाई और न ही कभी लगाउगा। न ही कभी जनविरोधी सरकार के आगे झुका और न ही आगे कभी झुकुंगा।




हजका अध्यक्ष वीरवार को हासी हलके के तीन दिवसीय जनसंपर्क अभियान के पहले दिन गाव हाजमपुर, ढाणी साकरी, मोरपुरा, ढाणी पुरिया, ढाणी राजू, ढाणी ठाकरिया, ढाणी गुजरान, पुट्ठी मंगलखा, ढाणी चदरपुर, खेड़ी गगन, ढाणी शोभा, कुंदनापुर, रीछपुरा, ढाणी पीरवाली, ढाणी कुम्हारान व ढाणा खुर्द में जनसभाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बीते लोकसभा व विधानसभा चुनावों में पार्टी उम्मीदवार को विजयी बनाने के लिए लोगों का धन्यवाद किया। विभिन्न गावों में पहुचने पर ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ो, फूल-मालाओं व पगड़ियों के साथ सामूहिक अभिनंदन किया।



कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा घोषणा मंत्री बन कर रह गए है। हर रैली में कई करोड़ की नई घोषणाएं तो होती है किंतु उन्हे अमलीजामा नहीं पहनाया जाता। इन रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए हुड्डा लोक लुभावनी घोषणाएं करते है। उन्होंने कहा कि अब तक की गई घोषणाओं में से दस प्रतिशत पर भी अमल नहीं हुआ। प्रदेश हजारों करोड़ के कर्ज तले दबा हुआ है। ऐसे में नई घोषणाओं के पूरा होने की कोई संभावना नहीं रह जाती। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष का काम लोगों की दुख-तकलीफों का निवारण करवाना व विकास कार्य करवाना होता है। अब भूपेंद्र हुड्डा जनसेवा का यह काम छोड़ कर रैलियों के नाम पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली-पानी, सड़क-परिवहन, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर ही हाहाकार मचा हुआ है।



हजका अध्यक्ष ने कहा कि लोग हुड्डा व चौटाला की मिलीभगत से तंग आ चुके है इसलिए अब राजनैतिक बदलाव चाहते है। सही राजनैतिक बदलाव के रूप में वे हजका को सही विकल्प के रूप में देखते है। इसलिए आने वाला समय हजका का है और जल्द होने वाले विधानसभा उपचुनावो में पार्टी भारी सफलता प्राप्त करेगी। इस अवसर पर उनके साथ पूर्व विधायक अमीरचंद मक्कड़, जिला प्रधान रणधीर सिंह पनिहार, रवींद्र मक्कड़, हलका प्रधान रवींद्र बहार व राजपाल सिंघवा, कृष्ण एलावादी, संतोष ढुल, तेजबीर मलिक, हरिसिंह यादव, रमेश सोलंकी, देसराज सरपंच, रामधन गिरधर, मनोज जागड़ा, जगमेंद्र जागड़ा, रमेश ढाणी ठाकरिया, सत्यवान दुहन, राजबीर ढाडा, रामनिवास राड़ा, सुभाष टाक, गुलजार काहलों, अंगूरी सैनी आदि सहित भारी संख्या में पार्टी नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे।