06 जून, 2011

हरियाणा में ‘लाल युग’ का अंत

चंडीगढ़. ..बड़े गौर से सुन रहा था जमाना, तुम्हीं सो गए दास्तां कहते-कहते..




कहावत है कि ‘हरियाणा में सिर्फ तीन लाल। देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल।’ राजनीतिक धुरंधर भजनलाल के निधन के साथ ही हरियाणवी सियासत का लाल युग भी समाप्त हो गया। राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक चर्चित लालों की राजनीति की अंतिम धुरी 81 वर्षीय भजनलाल शुक्रवार को आखिरी बार लोगों के बीच सशरीर मौजूद थे।



सियासी विरोधी भी थे मृदुभाषा के कायल



नई दिल्ली. पाकिस्तान के बहावलपुर में पैदा होने के बावजूद आदमपुर पंचायत में पंच से सियासी सफर की शरुआत करने वाले इस कुशल राजनेता ने सियासत की तमाम बुलंदियां हासिल कीं, लेकिन पद का दंभ उन्हें कभी छू तक नहीं पाया। एक कुशल राजनेता, अनुभवी प्रशासक के साथ-साथ उनकी मृदुभाषा के कायल उनके समर्थक ही नहीं, बल्कि सियासी विरोधी भी थे।



अपने रणनीतिक कौशल के बूते कठिन से कठिन हालात से साफ बच निकलने के फन में माहिर भजनलाल ने ‘नेवर से डाई’ की अवधारणा पर काम करते हुए जीवन के अंतिम पल तक हार नहीं मानीं। खराब सेहत के बावजूद 2009 के चुनाव में संपत सिंह व जयप्रकाश जैसे दिग्गजों को एक साथ पटखनी देकर उन्होंने अपने कौशल का प्रमाण दिया।



कई फैसले ऐसे, जो आज भी जुबान पर



चंडीगढ़. भजनलाल जैसे धुरंधर नेताओं की राजनीतिक कहानी कभी खत्म नहीं होती, बल्कि इतिहास बन जाती है। इस नेता के फैसले आज भी जन-जन, अफसरशाही और राजनेताओं की जुबान पर हैं। राजीव गांधी सरकार में पर्यावरण मंत्री रहते उन्होंने यमुना-गंगा जल शुद्धिकरण की योजना शुरू की। भजनलाल के मुख्यमंत्री काल के बारे में एक वरिष्ठ अफसर बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहला फैसला सफाई कर्मियों के वेतन में सौ रुपए का इजाफा करने का लिया। इससे श्रमिक वर्ग में उनकी अच्छी-खासी पैठ बन गई। पेयजल योजना और तीन किलोमीटर के दायरे में स्कूल जैसे निर्णय भजनलाल ने ही लिए थे।



केंद्र सरकार में थी अच्छी-खासी पैठ



चंडीगढ़. साधारण पंच के रूप में राजनीतिक मैदान में उतरे भजनलाल एक दिन केंद्र सरकार में जबरदस्त पैठ बना लेंगे, यह शायद उनके अलावा किसी ने नहीं सोचा होगा। उन पर राजीव गांधी को इतना भरोसा था कि उन्हें अपने प्रदेश के अलावा राजस्थान की भी कमान दी गई थी। यह अलग बात है कि वहां भैरो सिंह शेखावत बाजी मार ले गए।



भजनलाल 1 जनवरी 1968 को विधानसभा के सदस्य चुने गए। यह कारनामा उन्होंने 5 बार किया। 1 जनवरी 70 को वे प्रदेश के कृषि, सहकारिता व पशुपालन मंत्री बने। लोकसभा से मंत्री बनने के बाद वे राज्यसभा से भी एक बार मंत्री बने। 2007 में उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया।



परिचय



जन्म : 6 अक्टूबर 1930

स्थान: बहावलपूर (पाक पंजाब)

सियासी शुरुआत: आदमपुर पंचायत में पंच के रूप में

मुख्यमंत्री पद: दो बार संभाली कमान (1979-85), (1991-96)।



केंद्रीय राजनीति



राजीव गांधी के नेतृत्व वाली भारत सरकार में मंत्री रहे

एक बार राज्यसभा सदस्य भी रहे

आखिरी बार 2009 में हिसार से हजकां के चुनाव चिह्न् पर लोकसभा का चुनाव जीता



आतंकी निशाने पर भी थे



पंजाबी बोली के क्षेत्र और पानी के मुद्दे पर भजनलाल पंजाब के आतंकवादियों के निशाने पर भी रहे। वे 77 में देवीलाल की बहुमत वाली सरकार गिराने के बाद चर्चा में आए। 2005 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाने से खफा होकर भजनलाल ने कांग्रेस ने नाता तोड़ दिया। 2004 में भिवानी लोकसभा सीट से बेटे कुलदीप बिश्नोई को चुनाव लड़ाया। सामने देवीलाल के पोते अजय चौटाला और बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह थे। इस चुनाव में जीत से भजनलाल का नाम और चमक गया।



अधिकारी वर्ग पर पूरी पकड़



भजनलाल के करीबी रहे आईएएस सेवानिवृत्त एलएन मेहता बताते हैं कि उनकी अधिकारी वर्ग पर पूरी पकड़ थी। इंसानियत इतनी कि उनके घर में विशेष आदेश थे कि कोई बिना चाय-पानी न जाए।



लालों पर फिल्म भी बनी



हरियाणा के तीन लालों पर आधारित अनिल कपूर पर फिल्माई गई एक फिल्म भी आई, जो हरियाणा में खूब लोकप्रिय हुई। इस फिल्म में पूरे हरियाणा की सियासत तीनों लालों के इर्द-गिर्द दिखाई गई है।



अनुभवी नेता थे भजन: हुड्डा



सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भजनलाल एक अनुभवी नेता थे। उनका लंबे समय तक कांग्रेस से संबंध रहा। वे लंबे समय तक हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने पूरा जीवन समाजसेवा में गुजारा, जिनके निधन से हुई क्षति को भरना नामुमकिन है।



दूरदर्शी राजनीतिज्ञ: पहाड़िया



राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने भजनलाल के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भजनलाल एक योग्य सांसद, दूरदर्शी राजनीतिज्ञ और लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और अन्य पदों पर रहते हुए कुशल प्रशासक के रूप में छाप छोड़ी है।



हंसमुख स्वभाव था: चौटाला



इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने कहा कि हरियाणा ने भजनलाल के रूप में एक मृदुभाषी नेता खो दिया है। चौटाला ने भजनलाल को हंसमुख स्वभाव के राजनेता बताते हुए कहा कि उनके निधन से प्रदेश को गहरा झटका लगा है।



अच्छे राजनेता थे: फिजा



भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन की पूर्व पत्नी अनुराधा बाली उर्फ फिजा ने कहा कि भजनलाल अच्छे राजनेता थे। उनकी भजनलाल से कई बार बात हुई है। हालांकि फिजा ने भजनलाल के निजी जीवन पर सीधे तौर पर टिप्पणी नहीं की।

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