चंडीगढ़. हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा उपचुनाव से टाल-मटोल कर रहे हैं। इसलिए असंवैधानिक तरीके से हजकां छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों के मामले को टालने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा भी अपने पद की गरिमा भूलकर कांग्रेस कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं। वे भी हजकां के पांच विधायकों के मामले में टाल-मटोल कर रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि दलबदलू विधायकों की सदस्यता हर हाल में रद्द करवाई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने को लेकर माननीय उच्च न्यायालय को भी अवगत करवाया जाएगा।
हजकां अध्यक्ष ने बताया कि नए विधानसभा अध्यक्ष को 8 मार्च को मामले की आगामी सुनवाई करनी थी। इस सुनवाई के संबंध में दोनों पक्षों को लिखित रूप से सूचना दी गई थी। सुनवाई के लिए हजकां की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सतपाल जैन, धीरज जैन व देवेश मुद्गिल उपस्थित थे।
हजकां की ओर से मौजूद वकीलों द्वारा स्पीकर को बताया गया कि पहले ही मामले को 15 महीने बीत चुके हैं। उच्च न्यायालय में सुनवाई की तिथि पांच अप्रैल है, इसलिए तुरंत निर्णय लिया जाए। उन्होंने स्पीकर को बताया कि इस तरह के दल-बदल के मामलों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने तीन सप्ताह में निपटाने के निर्देश दिए हैं।
इसके अतिरिक्त भारत के अतिरिक्त महाअधिवक्ता ने भी पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय को विश्वास दिलाया था कि स्पीकर मामले का जल्द निपटारा करेंगे। इन सब तथ्यों को ध्यान में रखकर मामले की सुनवाई स्थगित करने की बजाय तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके बावजूद स्पीकर ने मामले को लंबा खींचने के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।
उन्होंने कहा कि नए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा भी अपने पद की गरिमा भूलकर कांग्रेस कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं। वे भी हजकां के पांच विधायकों के मामले में टाल-मटोल कर रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि दलबदलू विधायकों की सदस्यता हर हाल में रद्द करवाई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने को लेकर माननीय उच्च न्यायालय को भी अवगत करवाया जाएगा।
हजकां अध्यक्ष ने बताया कि नए विधानसभा अध्यक्ष को 8 मार्च को मामले की आगामी सुनवाई करनी थी। इस सुनवाई के संबंध में दोनों पक्षों को लिखित रूप से सूचना दी गई थी। सुनवाई के लिए हजकां की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सतपाल जैन, धीरज जैन व देवेश मुद्गिल उपस्थित थे।
हजकां की ओर से मौजूद वकीलों द्वारा स्पीकर को बताया गया कि पहले ही मामले को 15 महीने बीत चुके हैं। उच्च न्यायालय में सुनवाई की तिथि पांच अप्रैल है, इसलिए तुरंत निर्णय लिया जाए। उन्होंने स्पीकर को बताया कि इस तरह के दल-बदल के मामलों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने तीन सप्ताह में निपटाने के निर्देश दिए हैं।
इसके अतिरिक्त भारत के अतिरिक्त महाअधिवक्ता ने भी पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय को विश्वास दिलाया था कि स्पीकर मामले का जल्द निपटारा करेंगे। इन सब तथ्यों को ध्यान में रखकर मामले की सुनवाई स्थगित करने की बजाय तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके बावजूद स्पीकर ने मामले को लंबा खींचने के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।
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