पानीपत. हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि आए दिन उजागर हो रहे घोटालों के कारण केंद्र व राज्य सरकार का भ्रष्ट चेहरा जनता के सामने स्पष्ट हो गया है।
इसलिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व वित्त मंत्री कैप्टन अजय यादव इस्तीफा दें अन्यथा महामहिम राज्यपाल उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करें। उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने जज निर्मल यादव के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय बेंच गठित की थी। बेंच में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एचएल भूखले, गुजरात हाईकोर्ट के जज केएस राधाकृष्णन व दिल्ली हाईकोर्ट के जज मदन बी लाकूर को शामिल किया गया था। इस बेंच ने अपनी जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव की भूमिका को संदिग्ध माना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच कर रहे न्यायाधीशों के समक्ष तहसीलदार सतीश कुमार ने बयान दिया है कि वित्त मंत्री ने बार-बार फोन करके नियमों की अवहेलना करने के लिए दबाव बनाया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि विवादित जमीन के कॉ-परचेजर वित्त मंत्री खुद, उनकी पत्नी, पुत्र व पुत्री तथा दिल्ली के बिजनेसमैन रवींद्र सिंह हैं।
प्रदेश के वित्त मंत्री के लिए ऐसी स्थिति अत्यंत गंभीर है और उन्हें एक पल भी मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार नहीं। या तो वे इस्तीफा दें अन्यथा महामहिम राज्यपाल उन्हें बर्खास्त करें। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में भी वित्त मंत्री दोहरी नीति अपना रहे हैं। वे किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने के लिए संघर्ष करने की बजाय कोरी बयानबाजी कर रहे हैं।
इसलिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व वित्त मंत्री कैप्टन अजय यादव इस्तीफा दें अन्यथा महामहिम राज्यपाल उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करें। उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने जज निर्मल यादव के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय बेंच गठित की थी। बेंच में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एचएल भूखले, गुजरात हाईकोर्ट के जज केएस राधाकृष्णन व दिल्ली हाईकोर्ट के जज मदन बी लाकूर को शामिल किया गया था। इस बेंच ने अपनी जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव की भूमिका को संदिग्ध माना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच कर रहे न्यायाधीशों के समक्ष तहसीलदार सतीश कुमार ने बयान दिया है कि वित्त मंत्री ने बार-बार फोन करके नियमों की अवहेलना करने के लिए दबाव बनाया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि विवादित जमीन के कॉ-परचेजर वित्त मंत्री खुद, उनकी पत्नी, पुत्र व पुत्री तथा दिल्ली के बिजनेसमैन रवींद्र सिंह हैं।
प्रदेश के वित्त मंत्री के लिए ऐसी स्थिति अत्यंत गंभीर है और उन्हें एक पल भी मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार नहीं। या तो वे इस्तीफा दें अन्यथा महामहिम राज्यपाल उन्हें बर्खास्त करें। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में भी वित्त मंत्री दोहरी नीति अपना रहे हैं। वे किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने के लिए संघर्ष करने की बजाय कोरी बयानबाजी कर रहे हैं।
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