सिरसा। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की कुलदीप बिश्रोई से बढ़ती नजदीकियां हरियाणा जनहित कांग्रेस का कांग्रेस से संभावित विलय खटाई में डाल सकती है। हजकां संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पंचतत्व में विलीन होने पर शोक व्यक्त करने हिसार आये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का कुलदीप बिश्नोई को दिल्ली में मिलने के निमंत्रण से क्यास लगाया जा रहा है कि भाजपा ने हजकां पर डोरे डालने शुरू कर दिए है।
कांग्रेस आलाकमान का प्रयास था कि हजकां कांग्रेस में विलय कर जाये, ताकि मुख्यमंत्री हुड्डा को मजबूती देने के साथ साथ हिसार संसदीय उपचुनाव में 'विजय श्री' कांग्रेस की हो, मगर हजकां सुप्रीमों की मुख्यमंत्री बदलने तथा हजकां से कांग्रेस में गए पांचो विधायकों की सदस्यता रद्द करवाने की जिद्द पकड़े हुए है। हुड्डा के स्थान पर नए व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे कुलदीप बिश्रोई का एक ही उद्देश्य है कि चौ. भजन लाल से हुए राजनीतिक अपमान का बदला लेना है।
कुलदीप बिश्रोई की शर्तों को देखते हुए ऐसा लगता है कि हजकां का कांग्रेस में विलय होना मुश्किल है। दूसरी तरफ हजकां सुप्रीमों भाजपा से तालमेल कर हिसार संसदीय उपचुनाव में जीत हासिल कर प्रदेश में हजकां का जनाधार बढ़ाना चाहते है। हिसार उपचुनाव को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस व विपक्षी दल इनेलो भी गंभीर है। भाजपा-हजकां से तालमेल करके न सिर्फ हिसार उपचुनाव से बचना चाहती है, बल्कि हजकां का कंधा लेकर राज्य में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है।
भाजपा की रणनीति को लेकर राज्य के राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा का बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से तालमेल कर सत्ता में आना और फिर हविपा को त्याग देने, इनेलो से समझौता और दूरी के चलते अपनी विश्वसीनयता पर प्रश्र चिन्ह अंकित कर दिये है। हिसार चूंकि स्व. भजनलाल का निजी राजनीतिक गढ़ है, जिससे भाजपा भी लांभावित होने की सोच रखती है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की भी इस उपचुनाव पर नजरें है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल इनेलो का प्रयास है कि इस उपचुनाव में विजय पताका लहराकर एहसास करवाया जा सके कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की डुगडुगी बज चुकी है और प्रदेश में कांग्रेस के विकल्प के रूप में इनेलो ही उभर रही है।
हजकां की भी यह कोशिश है कि हिसार उपचुनाव जीतकर यह प्रमाण दिया जा सके कि अभी भी भजनलाल का जादू सर चढ़ कर बोलता है। इनेलो और हविपा के साथ भाजपा का तालमेल कारगर सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए नए दल हजकां के साथ हाथ मिलाने के सोच लिए हुए है। हजकां का तालमेल किसी भी दल से हो या नहीं, मगर यह स्पष्ट है कि हिसार उपचुनाव में हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई की माता जसमा देवी या पत्नी रेणुका बिश्रोई जरूर चुनावी दंगल में उतरेंगी। भाजपा का यदि हजकां तालमेल हो जाता है, तो इनेलो तथा कांग्रेस को अपने राजनीतिक गणित में बदलाव करना पड़ सकता है। हजकां सुप्रीमों की कांग्रेस में विलय से पूर्व रखी गई शर्तों से स्पष्ट दिखाई देता है कि हजकां के कांग्रेस में विलय पर ग्रहण लग गया है।
कांग्रेस आलाकमान का प्रयास था कि हजकां कांग्रेस में विलय कर जाये, ताकि मुख्यमंत्री हुड्डा को मजबूती देने के साथ साथ हिसार संसदीय उपचुनाव में 'विजय श्री' कांग्रेस की हो, मगर हजकां सुप्रीमों की मुख्यमंत्री बदलने तथा हजकां से कांग्रेस में गए पांचो विधायकों की सदस्यता रद्द करवाने की जिद्द पकड़े हुए है। हुड्डा के स्थान पर नए व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे कुलदीप बिश्रोई का एक ही उद्देश्य है कि चौ. भजन लाल से हुए राजनीतिक अपमान का बदला लेना है।
कुलदीप बिश्रोई की शर्तों को देखते हुए ऐसा लगता है कि हजकां का कांग्रेस में विलय होना मुश्किल है। दूसरी तरफ हजकां सुप्रीमों भाजपा से तालमेल कर हिसार संसदीय उपचुनाव में जीत हासिल कर प्रदेश में हजकां का जनाधार बढ़ाना चाहते है। हिसार उपचुनाव को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस व विपक्षी दल इनेलो भी गंभीर है। भाजपा-हजकां से तालमेल करके न सिर्फ हिसार उपचुनाव से बचना चाहती है, बल्कि हजकां का कंधा लेकर राज्य में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है।
भाजपा की रणनीति को लेकर राज्य के राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा का बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से तालमेल कर सत्ता में आना और फिर हविपा को त्याग देने, इनेलो से समझौता और दूरी के चलते अपनी विश्वसीनयता पर प्रश्र चिन्ह अंकित कर दिये है। हिसार चूंकि स्व. भजनलाल का निजी राजनीतिक गढ़ है, जिससे भाजपा भी लांभावित होने की सोच रखती है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की भी इस उपचुनाव पर नजरें है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल इनेलो का प्रयास है कि इस उपचुनाव में विजय पताका लहराकर एहसास करवाया जा सके कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की डुगडुगी बज चुकी है और प्रदेश में कांग्रेस के विकल्प के रूप में इनेलो ही उभर रही है।
हजकां की भी यह कोशिश है कि हिसार उपचुनाव जीतकर यह प्रमाण दिया जा सके कि अभी भी भजनलाल का जादू सर चढ़ कर बोलता है। इनेलो और हविपा के साथ भाजपा का तालमेल कारगर सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए नए दल हजकां के साथ हाथ मिलाने के सोच लिए हुए है। हजकां का तालमेल किसी भी दल से हो या नहीं, मगर यह स्पष्ट है कि हिसार उपचुनाव में हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई की माता जसमा देवी या पत्नी रेणुका बिश्रोई जरूर चुनावी दंगल में उतरेंगी। भाजपा का यदि हजकां तालमेल हो जाता है, तो इनेलो तथा कांग्रेस को अपने राजनीतिक गणित में बदलाव करना पड़ सकता है। हजकां सुप्रीमों की कांग्रेस में विलय से पूर्व रखी गई शर्तों से स्पष्ट दिखाई देता है कि हजकां के कांग्रेस में विलय पर ग्रहण लग गया है।
