03 जुलाई, 2011

भाजपा ने लगाया हजकां-कांग्रेस विलय पर ग्रहण

सिरसा। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की कुलदीप बिश्रोई से बढ़ती नजदीकियां हरियाणा जनहित कांग्रेस का कांग्रेस से संभावित विलय खटाई में डाल सकती है। हजकां संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पंचतत्व में विलीन होने पर शोक व्यक्त करने हिसार आये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का कुलदीप बिश्नोई को दिल्ली में मिलने के निमंत्रण से क्यास लगाया जा रहा है कि भाजपा ने हजकां पर डोरे डालने शुरू कर दिए है।

कांग्रेस आलाकमान का प्रयास था कि हजकां कांग्रेस में विलय कर जाये, ताकि मुख्यमंत्री हुड्डा को मजबूती देने के साथ साथ हिसार संसदीय उपचुनाव में 'विजय श्री' कांग्रेस की हो, मगर हजकां सुप्रीमों की मुख्यमंत्री बदलने तथा हजकां से कांग्रेस में गए पांचो विधायकों की सदस्यता रद्द करवाने की जिद्द पकड़े हुए है। हुड्डा के स्थान पर नए व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे कुलदीप बिश्रोई का एक ही उद्देश्य है कि चौ. भजन लाल से हुए राजनीतिक अपमान का बदला लेना है।

कुलदीप बिश्रोई की शर्तों को देखते हुए ऐसा लगता है कि हजकां का कांग्रेस में विलय होना मुश्किल है। दूसरी तरफ हजकां सुप्रीमों भाजपा से तालमेल कर हिसार संसदीय उपचुनाव में जीत हासिल कर प्रदेश में हजकां का जनाधार बढ़ाना चाहते है। हिसार उपचुनाव को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस व विपक्षी दल इनेलो भी गंभीर है। भाजपा-हजकां से तालमेल करके न सिर्फ हिसार उपचुनाव से बचना चाहती है, बल्कि हजकां का कंधा लेकर राज्य में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है।

भाजपा की रणनीति को लेकर राज्य के राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा का बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से तालमेल कर सत्ता में आना और फिर हविपा को त्याग देने, इनेलो से समझौता और दूरी के चलते अपनी विश्वसीनयता पर प्रश्र चिन्ह अंकित कर दिये है। हिसार चूंकि स्व. भजनलाल का निजी राजनीतिक गढ़ है, जिससे भाजपा भी लांभावित होने की सोच रखती है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की भी इस उपचुनाव पर नजरें है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल इनेलो का प्रयास है कि इस उपचुनाव में विजय पताका लहराकर एहसास करवाया जा सके कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की डुगडुगी बज चुकी है और प्रदेश में कांग्रेस के विकल्प के रूप में इनेलो ही उभर रही है।

हजकां की भी यह कोशिश है कि हिसार उपचुनाव जीतकर यह प्रमाण दिया जा सके कि अभी भी भजनलाल का जादू सर चढ़ कर बोलता है। इनेलो और हविपा के साथ भाजपा का तालमेल कारगर सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए नए दल हजकां के साथ हाथ मिलाने के सोच लिए हुए है। हजकां का तालमेल किसी भी दल से हो या नहीं, मगर यह स्पष्ट है कि हिसार उपचुनाव में हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई की माता जसमा देवी या पत्नी रेणुका बिश्रोई जरूर चुनावी दंगल में उतरेंगी। भाजपा का यदि हजकां तालमेल हो जाता है, तो इनेलो तथा कांग्रेस को अपने राजनीतिक गणित में बदलाव करना पड़ सकता है। हजकां सुप्रीमों की कांग्रेस में विलय से पूर्व रखी गई शर्तों से स्पष्ट दिखाई देता है कि हजकां के कांग्रेस में विलय पर ग्रहण लग गया है।

हिसार उपचुनावः हर दल के कद्दावर नेता का कद लगा दांव पर

चंडीगढ़. हिसार लोकसभा उपचुनाव की तारीख आने में भले ही अभी करीब साढ़े पांच महीने का समय है। बावजूद इसके प्रदेश भर में इस उपचुनाव की महाभारत शुरू हो गई है। राज्य के रोचक उपचुनावों में इसका इतिहास लिखा जाएगा। वैसे तो इस क्षेत्र से लगभग सभी दलों के कद्दावर कहे जाने नेताओं का जुड़ाव है लेकिन मुख्य रूप से भजनलाल के जाने के बाद उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक भविष्य उपचुनाव तय करेगा।

मुख्यमंत्री हुड्डा द्वारा कराए गए इस क्षेत्र के विकास पर कांग्रेस वोट लेगी। हालांकि केन्द्रीय मंत्री कुमारी सैलजा का हिसार गृह जिला है। उनके परिजन रोहताश का नाम टिकट के चल भी रहा है। दूसरे राष्ट्रीय महासचिव बीरेंद्र सिंह का विधानसभा क्षेत्र उचाना इसी क्षेत्र में है। उनकी पत्नी प्रेमलता का नाम टिकट के लिए जनता ले रही है। जिंदल परिवार का पूरा साम्राज्य इसी जिले से चलता है।

हाल कांग्रेस में शामिल हुए संपत सिंह यहीं से इनेलो के टिकट पर दूसरे नंबर रहे थे। भिवानी का एक विधानसभा क्षेत्र बवानीखेड़ा इसी लोकसभा क्षेत्र में आता है तो भिवानी के धुरंधर मंत्री, सीपीएस की भी परीक्षा होगी? परिसीमन से पहले यहां के क्षेत्र भिवानी लोकसभा में थे,जहां मंत्री किरण चौधरी के पति सुरेंद्र सिंह चुनाव लड़ भी चुके हैं। सीपीएस धर्मवीर,रामकिशन फौजी का यहां बड़ा हस्तक्षेप रहता है।

भले ही वोट हुड्डा के विकास के नाम पर ज्यादा पड़े लेकिन असली परीक्षा तो इन दिग्गजों की भी है क्योंकि ये क्षेत्र से सीधे जुड़े हैं। जहां तक इनेलो का सवाल है। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला इसी क्षेत्र की उचाना सीट से विधायक हैं। फिलहाल इनेलो नेताओं ने यहां पूरा दम लगा रखा है। जिले के इनेलो नेता रणबीर गंगवा राज्यसभा सदस्य हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन अभिमन्यु यहां की नारनौंद सीट से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। जहां तक भजनलाल परिवार का सवाल है। उनकी पार्टी हजकां से सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई का आदमपुर क्षेत्र इसी लोकसभा में आता है। उनकी माता जसमा देवी ने यहीं की नलवा सीट से विस चुनाव हारा था। ऐसे में मामला रोचक होगा। इनके अलावा सभी दलों से टिकट मांग रहे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है।

इन पर हो रही माथा-पच्ची 

भजनलाल परिवार के प्रति सहानुभूति रहेगी या नहीं?
सीएम भूपेन्द्र हुड्डा के इस क्षेत्र में विकास के बड़े बजट का कर्ज जनता कितना चुकाएगी?
इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का सरकार विरोधी अभियान क्या गुल खिलाएगा?
इसके अलावा इस क्षेत्र के रचे-बसे बड़े कहे जाने वाले कई नेता,मंत्री, सीपीएस व राज्यसभा सदस्य अपने दलों को क्या योगदान देंगे?
क्या भाजपा हजकां को समर्थन देगी?


चुनाव आयोग को भेजा प्रस्ताव 

राज्य कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन अधिकारी एसके सेतिया ने भास्कर को बताया कि चुनाव आयोग को रिक्त सीट पर चुनाव कराने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। संभवत:अगस्त तक चुनाव की तारीख आने की संभावना है। वैसे तो छह महीने के अनुसार दिसंबर तक चुनाव होना है लेकिन आयोग तारीख अपने अनुसार देगा। इस कड़ी में राज्य निर्वाचन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। चुनाव के सामान व अन्य व्यवस्थाओं का खाका तैयार
किया जा रहा है।