12 अप्रैल, 2010

क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार पूर्ण नीतियों से बाज आएं हुड्डा

रविंदर सिंह भाटिया हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार पूर्ण नीतियों से बाज आना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समूचे प्रदेश का नेतृत्व करता है जबकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा विकास व रोजगार के मामले में किलोई हलके को छोड़कर समूचे प्रदेश की अनदेखी कर रहे हैं। हाल ही में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने करीब 2000 पीटीआई टीचर्स की भर्ती की है।
भर्ती में घोर अनियमितताएं बरती गई हैं जिससे अयोग्य लोगों को तो नियुक्ति मिल गई किंतु उच्च योग्यता रखने वाले क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार का शिकार बनकर बेरोजगार ही रह गए। उन्होंने कहा कि केंद्र की कांग्रेस सरकार शिक्षा की अनिवार्यता का राग अलाप रही है जबकि प्रदेश की कांग्रेसी सरकार उच्च शैक्षिक योग्यता वाले उम्मीदवारों की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में अनिवार्य शिक्षा का क्या औचित्य रह गया है।
हजकां अध्यक्ष ने कहा कि पीटीआई टीचर्स की यह भर्ती पिछले पांच साल से लंबित थी। पहले भर्ती के लिखित परीक्षा का प्रावधान रखा गया किंतु अपने चहेतों को नौकरियां देने के लिए इस परीक्षा को समाप्त कर दिया गया। इसके अतिरिक्त शुरू में 66 प्रतिशत अंक वालों को ही आवेदन का अधिकार दिया गया था किंतु बाद में इस बाध्यता को भी समाप्त कर दिया गया।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने चहेतों को भर्ती का लाभ देने के लिए 60 अंक शैक्षिक योग्यता के तथा 30 अंक साक्षात्कार के निर्धारित किए गए। भर्ती की नियुक्ति में गेस्ट टीचर्स को तवज्जो नहीं दी गई और उच्च शैक्षिक योग्यता वालों को भी दरकिनार किया गया। मैट्रीक पास को नियुक्ति दे दी गई। ऐसे में एमफिल व पीएचडी योग्यता वाले बेरोजगार ही रह गए।
कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भ्रष्ट व अपरिपक्व नीतियों के कारण आज प्रदेश भीषण आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के बजट से पहले ही प्रदेश पर करीब 17 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था जो वार्षिक बजट के मिस-मैनेजमेंट के कारण और अधिक बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति पूरी तरह डगमगा गई है और नौबत यह आ चुकी है कि सरकार को अब कर्ज लेने के लिए बोली लगवानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यही हालात रहे तो आने वाले कुछ सालों में प्रदेश पर कर्ज का बोझ इतना बढ़ जाएगा कि सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति को भी बेचना पड़ेगा।

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